ताम्बे के बर्तन में पानी पीने के 5 फायदे*

Wednesday, June 22, 2022

*
1. ताम्बे का पानी पीने से दिमाग उत्तेजित होता है अर्थात यह दिमाग को सक्रिय करता है, जिससे स्मरणशक्ति भी बढ़ती है।

2. यह पानी पीने से सूजन और शरीर में दर्द जैसी समस्याओं में रहत मिलती है। ताम्बे में एंटी इन्फ्लमेट्री गुण होते हैं और पानी को उसमें रखने से पानी में भी वही गुण आ जाते हैं।

3. ताम्बे का पानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है , जिससे हृदय सम्बंधित समस्याओं की सम्भावना कम हो जाती है।

4. यह पानी त्वचा के उपचार के लिए कारगर है, यह अंदर से बॉडी को शुद्ध करता है जिससे कील-मुहासे तो कम होते ही हैं साथ में त्वचा तमकदार भी बनती है।

5. ताम्बे का पानी पेट की समस्याओं में लाभकारी है। गैस, अपच, कब्ज इत्यादि की समस्या इससे दूर होती है।
C/p

जीवनीय शक्ति के आधार पर दिनचर्या

Thursday, June 16, 2022

*जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या* 


*प्रातः 3 से 5 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से फेफड़ो में होती है। थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । इस समय दीर्घ श्वसन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता खूब विकसित होती है। उन्हें शुद्ध वायु (आक्सीजन) और ऋण आयन विपुल मात्रा में मिलने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते है, और सोते रहनेवालो का जीवन निस्तेज हो जाता है ।*

*प्रातः 5 से 7 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आंत में होती है। प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान का लेना चाहिए । सुबह 7 के बाद जो मल – त्याग करते है उनकी आँतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।*

*प्रातः 7 से 9 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आमाशय में होती है। यह समय भोजन के लिए उपर्युक्त है । इस समय पाचक रस अधिक बनते हैं। भोजन के बीच –बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार ) घूँट-घूँट पिये।*

*प्रातः 11 से 1 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से हृदय में होती है। दोपहर 12 बजे के आस–पास मध्याह्न – संध्या (आराम ) करने की हमारी संस्कृति में विधान है। इसीलिए भोजन वर्जित है । इस समय तरल पदार्थ ले सकते है। जैसे मट्ठा पी सकते है। दही खा सकते है ।*

*दोपहर 1 से 3 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से छोटी आंत में होती है। इसका कार्य आहार से मिले पोषक तत्त्वों का अवशोषण व व्यर्थ पदार्थों को बड़ी आँत की ओर धकेलना है। भोजन के बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है*

*दोपहर 3 से 5  इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मूत्राशय में होती है । 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृति होती है।*

*शाम 5 से 7  इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय हल्का भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से 40 मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन न करे। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते है । देर रात को किया गया भोजन सुस्ती लाता है यह अनुभवगम्य है।*

*रात्री 7 से 9  इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मस्तिष्क में होती है । इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है । आधुनिक अन्वेषण से भी इसकी पुष्टी हुई है।*

*रात्री 9 से 11  इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय पीठ के बल या बायीं करवट लेकर विश्राम करने से मेरूरज्जु को प्राप्त शक्ति को ग्रहण करने में मदद मिलती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है । यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।*

*रात्री 11 से 1  इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से पित्ताशय में होती है । इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा , नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएं बनती है ।*

*रात्री 1 से 3  इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से लीवर में होती है । अन्न का सूक्ष्म पाचन करना यह यकृत का कार्य है। इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन-तंत्र को बिगाड़ देता है । इस समय यदि जागते रहे तो शरीर नींद के वशीभूत होने लगता है, दृष्टि मंद होती है और शरीर की प्रतिक्रियाएं मंद होती हैं। अतः इस समय सड़क दुर्घटनाएँ अधिक होती हैं।*

 *ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखे, जिससे ऊपर बताए भोजन के समय में खुलकर भूख लगे। जमीन पर कुछ बिछाकर सुखासन में बैठकर ही भोजन करें। इस आसन में मूलाधार चक्र सक्रिय होने से जठराग्नि प्रदीप्त रहती है। कुर्सी पर बैठकर भोजन करने में पाचनशक्ति कमजोर तथा खड़े होकर भोजन करने से तो बिल्कुल नहींवत् हो जाती है। इसलिए ʹबुफे डिनरʹ से बचना चाहिए।*

*पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का लाभ लेने हेतु सिर पूर्व या दक्षिण दिशा में करके ही सोयें, अन्यथा अनिद्रा जैसी तकलीफें होती हैं।*

*शरीर की जैविक घड़ी को ठीक ढंग से चलाने हेतु रात्रि को बत्ती बंद करके सोयें। इस संदर्भ में हुए शोध चौंकाने वाले हैं। देर रात तक कार्य या अध्ययन करने से और बत्ती चालू रख के सोने से जैविक घड़ी निष्क्रिय होकर भयंकर स्वास्थ्य-संबंधी हानियाँ होती हैं। अँधेरे में सोने से यह जैविक घड़ी ठीक ढंग से चलती है।*

*आजकल पाये जाने वाले अधिकांश रोगों का कारण अस्त-व्यस्त दिनचर्या व विपरीत आहार ही है। हम अपनी दिनचर्या शरीर की जैविक घड़ी के अनुरूप बनाये रखें तो शरीर के विभिन्न अंगों की सक्रियता का हमें अनायास ही लाभ मिलेगा। इस प्रकार थोड़ी-सी सजगता हमें स्वस्थ जीवन की प्राप्ति करा देगी।*
C/p

महत्वपूर्ण बातें

Friday, May 27, 2022

❤️ Normal Value ❤
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:-
 1. बीपी: 120/80

 2. पल्स: 70 - 100

 3. तापमान: 36.8 - 37

 4. सांस : 12-16

 5. हीमोग्लोबिन: 
     नर -13.50-18
     मादा - 11.50 - 16 

 6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200

 7. पोटेशियम: 3.50 - 5

 8. सोडियम: 135 - 145

 9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220

 10. शरीर में खून की मात्रा :
       पीसीवी 30-40%

 11. शुगर लेवल: 
      बच्चों के लिए (70-130)
      वयस्क: 70 - 115

 12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम

 13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC: 
      4000 - 11000

 14. प्लेटलेट्स: 
      1,50,000 - 4,00,000

 15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC:
      4.50 - 6 मिलियन..

 16. कैल्शियम: 
       8.6 - 10.3 मिलीग्राम/डीएल

 17. विटामिन डी3:
      20 - 50 एनजी/एमएल 

18. विटामिन बी12: 
    200 - 900 पीजी/एमएल

   *वरिष्ठ यानि 40/ 50/ 60 वर्ष  वालों के लिए विशेष टिप्स:*
   

1-  *पहला सुझाव:*
 प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं... सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं।

2-  *दूसरा सुझाव :*
शरीर से अधिक से अधिक काम ले, शरीर को हिलाना चाहिए, भले ही केवल पैदल चलकर... या तैराकी...या किसी भी प्रकार के खेल से। 

  3- *तीसरा सुझाव:*
 खाना कम करो....
अधिक भोजन की लालसा को छोड़ दें... क्योंकि यह कभी अच्छा नहीं लाता है। अपने आप को वंचित न करें, लेकिन मात्रा कम करें।  प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आधारित खाद्य पदार्थों का अधिक प्रयोग करें।

 5-  *चौथा सुझाव*
 जितना हो सके वाहन का प्रयोग तब तक न करें जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो... आप कहीं जाते हैं किराना लेने, किसी से मिलने... या किसी काम के लिए अपने पैरों पर चलने की कोशिश करें।  लिफ्ट, स्लाईडर का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियां चढ़ें।

 5- *पांचवां सुझाव*
 क्रोध छोड़ो...
 चिंता छोड़ो... चीजों को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करो...
विक्षोभ की स्थितियों में स्वयं को शामिल न करें .... वे सभी स्वास्थ्य को कम करते हैं और आत्मा के वैभव को छीन लेते हैं।  सकारात्मक लोगों से बात करें और उनकी बात सुनें !

6- *छठा सुझाव*
 उम्र के ढलते पडाव में पैसे रकम आदि का मोह छोड़ दे 
अपने आस-पास के लोगो से खूब मिलें जुलें हंसें बोलें!
पैसा जीने के लिए बनाया गया था, जीवन पैसे के लिए नहीं। 

7- *सातवां सुझाव*
 अपने आप के लिए किसी तरह का अफ़सोस महसूस न करें, न ही किसी ऐसी चीज़ पर जिसे आप हासिल नहीं कर सके, और न ही ऐसी किसी चीज़ पर जिसे आप अपना नहीं सकते इन सभी के बारे में अफसोस करने के बजाय हमेशा अनदेखा कर भुल जाए! 
अपनी जरूरत वाली प्राथमिक सुविधाओं के अलावा अन्य किसी भी तरह की सुविधाओं की अपेक्षा नहीं रखें  ! इच्छाओं को सिमित रखें  ! 
 इसे अनदेखा करें और इसे भूल जाएं।

8- *आठवां सुझाव*
पैसा, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सुन्दरता, जाति की ठसक और प्रभाव ....
ये सभी चीजें हैं जो अहंकार से भर देती हैं.... लेकिन आज है और कल नहीं है अत: उसके पिछे जरूरत से ज्यादा समय व्यर्थ नहीं करें  ! 
विनम्रता को प्राथमिकता दे जो लोगों को प्यार से आपके करीब लाती है। 

9- *नौवां सुझाव*
 अगर आपके बाल सफेद हो गए हैं, तो इसका मतलब जीवन का अंत नहीं है।  यह एक बेहतर जीवन की शुरुआत हो चुकी है। आशावादी बनो, याद के साथ जियो, यात्रा करो, आनंद लो। यादें बनाओ!

10- *दसवां सुझाव*
अपने से छोटों से भी प्रेम, सहानुभूति ओर अपनेपन से मिलें! कोई व्यंग्यात्मक बात न कहें!  चेहरे पर मुस्कुराहट बनाकर रखें !  
अतीत में आप चाहे कितने ही बड़े पद पर रहे हों वर्तमान में उसे भूल जाये और सबसे मिलजुलकर रहें!
🙏

कोलेस्ट्रॉल कैसे कम करें

Tuesday, May 24, 2022


अलसी के बीज से बेड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार होते है. अध्ययन के अनुसार रोजाना अलसी के बीज खाने से आपका कोलेस्ट्रॉल का लेवल 6 से 11 प्रतिशत तक कम हो सकता है. ऐसा संभव भी है, क्योंकि इसमें हाइ फाइबर और लिगनेन कंटेंट होता है.
अर्जुन की छाल दिल के रोगियों के लिए एक असरकारक दवा है। जिनका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है और थोड़ा भी पैदल चलने पर सांस फूलने लगती है, उन्हें अर्जुन की छाल की चाय अवश्य पीनी चाहिए। अर्जुन की छाल धमनियों में जमने वाले कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लूसराइड को कम करती है। इससे दिल को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां सुचारू काम करने लगती हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लूसराइड का ज्यादा बढ़ना दिल के लिए घातक हो जाता है। इससे कई बार हार्ट अटैक आने का भी खतरा रहता है। ऐसे मरीजों को रोज अर्जुन की छाल का इस्तेमाल किसी न किसी रूप में अवश्य करना चाहिये 
एक कप पानी में दो चम्मच मधु, तथा तीन चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिला लें। इसका रोज 3 बार सेवन करें। इससे कोलेस्ट्राल कम होता है। 
सूर्यमुखी (सूरजमुखी) के तेल और बीज में अनसैचुरेटेड पॉली फैटी एसिड पाया जाता है जो कि कलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी लाभकारी है
राजमा, चने, मूंग, सोयाबीन और उड़द इत्यादि को अंकुरित कर सलाद के तौर पर इस्तेमाल करें तो भी कलेस्ट्रॉल कम होगा
सुबह उठकर 2-3 अखरोट नियमित तौर पर खाने से कलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
C/p

लौकी के फायदे

Monday, May 23, 2022

लौकी में पानी की मात्रा ज्यादा होती है और इसके साथ ही इसमें विटामिन-सी, राइबोफ्लेविन, जिंक, थायमिन, आयरन, मैग्नीज, मैग्नेशियम और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। सब्जियों में शामिल लौकी का सेवन बेहद लाभकारी माना जाता है। लौकी की सब्जी का सेवन किया जा सकता है और इसके जूस का सेवन भी लाभकारी माना जाता है। 


इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन से निम्नलिखित शारीरिक परेशानियों से बचा जा सकता है। जैसे –

1.दिल की बीमारी- कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने से दिल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं हरी सब्जियों में शामिल लौकी में जीरो कोलेस्ट्रॉल होता है और साथ ही साथ यह एंटीऑक्सिडेंट भी है। जिससे यह शरीर में बैड कोलेस्टॉल को बढ़ने से रोकती है। इसलिए दिल की बीमारी से बचने के लिए इसका सेवन करना लाभदायक माना जाता है। हरी सब्जियों के फायदे हों इसलिए नियमित रूप से लौकी का सेवन करना चाहिए।

2.ब्लड फ्यूरिफाइयर– लौकी ब्लड फ्यूरिफाइयर का भी काम करती है। लौकी को उबालकर सेवन करने से खून साफ होता है और मुहांसों और फुंसियों की शिकायत भी कम हो जाती है। त्वचा संबंधी परेशानी से बचा जा सकता है।

3.यूरिन इंफेक्शन– शरीर में सोडियम के लेवल बढ़ने से यूरिन इंफेक्शन की समस्या बढ़ जाती है, जिससे यूरिन के दौरान जलन जैसी समस्या शुरू हो जाती है। यूरिन इंफेक्शन को दूर करने में इसका रस काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

4.ग्लूकोज लेवल रहता है ठीक- लौकी में प्राकृतिक रूप से शुगर होता है, जो कि शरीर को जरूरी ग्लूकोज का स्तर प्रदान करता है। इस वजह से यह पोस्ट वर्कआउट ड्रिंक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए सही विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो कि मसल्स की कार्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं और इससे मसल्स स्ट्रॉन्ग होती हैं।

5.डिप्रेशन- लौकी में कोलीन (choline) की मौजूदगी होती है। दरअसल कोलीन एक तरह का न्यूरोट्रांसमीटर होता है, जो कि दिमाग की कार्य क्षमता को सुधारता है और स्ट्रेस, डिप्रेशन और अन्य मानसिक परेशानियों से राहत दिलाने का भी काम करता है।

इन शारीरिक परेशानियों को दूर करने के साथ-साथ लौकी खाने से कई अन्य शारीरिक परेशानियों से बचा जा सकता है।

लौकी के फायदे तो हैं लेकिन, इसके सेवन से नुकसान भी हो सकता है। आहार विशेषज्ञों की माने तो शुरुआत में लौकी के जूस के सेवन से कब्ज और पेट खराब होने की समस्या हो सकती है, खाली पेट में इसके जूस के सेवन से गैस और जी मिचलाने जैसी समस्या हो सकती है। वहीं गर्भवती महिलाएं इसके जूस का सेवन कभी न करें क्योकि इससे गर्भपात होने का खतरा बढ़ सकता है।

C/p

सामान्य उपाय स्वस्थ रहने के

Sunday, April 24, 2022

👉 *आंवला*
किसी भी रूप में थोड़ा सा
आंवला हर रोज़ खाते रहे,
जीवन भर उच्च रक्तचाप
और हार्ट फेल नहीं होगा।
👉 *मेथी*
मेथीदाना पीसकर रख ले।
एक चम्मच एक गिलास
पानी में उबाल कर नित्य पिए।
मीठा, नमक कुछ भी नहीं डाले।
इस से आंव नहीं बनेगी,
शुगर कंट्रोल रहेगी और
जोड़ो के दर्द नहीं होंगे
और पेट ठीक रहेगा।
👉 *नेत्र स्नान*
मुंह में पानी का कुल्ला भर कर
नेत्र धोये।
ऐसा दिन में तीन बार करे।
जब भी पानी के पास जाए
मुंह में पानी का कुल्ला भर ले
और नेत्रों पर पानी के छींटे मारे, धोये।
मुंह का पानी एक मिनट बाद
निकाल कर पुन: कुल्ला भर ले।
मुंह का पानी गर्म ना हो इसलिए
बार बार कुल्ला नया भरते रहे।
भोजन करने के बाद गीले हाथ
तौलिये से नहीं पोंछे।
आपस में दोनों हाथो को रगड़ कर
चेहरा व कानो तक मले।
इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं।
नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं।
👉 *शौच*
ऐसी आदत डाले के नित्य
शौच जाते समय दाँतो को
आपस में भींच कर रखे।
इस से दांत मज़बूत रहेंगे,
तथा लकवा नहीं होगा।
👉 *छाछ*
तेज और ओज बढ़ने के लिए
छाछ का निरंतर सेवन
बहुत हितकर हैं।
सुबह और दोपहर के भोजन में
नित्य छाछ का सेवन करे।
भोजन में पानी के स्थान पर
छाछ का उपयोग बहुत हितकर हैं।
👉 *सरसों तेल*
सर्दियों में हल्का गर्म सरसों तेल
और गर्मियों में ठंडा सरसों तेल
तीन बूँद दोनों कान में
कभी कभी डालते रहे।
इस से कान स्वस्थ रहेंगे।
👉 *निद्रा*
दिन में जब भी विश्राम करे तो
दाहिनी करवट ले कर सोएं। और
रात में बायीं करवट ले कर सोये।
दाहिनी करवट लेने से बायां स्वर
अर्थात चन्द्र नाड़ी चलेगी, और
बायीं करवट लेने से दाहिना स्वर
अर्थात सूर्य स्वर चलेगा।
👉 *ताम्बे का पानी*
रात को ताम्बे के बर्तन में
रखा पानी सुबह उठते बिना
कुल्ला किये ही पिए,
निरंतर ऐसा करने से आप
कई रोगो से बचे रहेंगे।
ताम्बे के बर्तन में रखा जल
गंगा जल से भी अधिक
शक्तिशाली माना गया हैं।
👉 *सौंठ*
सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम
और कफ से बचने के लिए
पीसी हुयी आधा चम्मच सौंठ
और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में
इतना उबाले के आधा पानी रह जाए।
रात को सोने से पहले यह पिए।
बदलते मौसम, सर्दी व वर्षा के
आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं।
सौंठ नहीं हो तो अदरक का
इस्तेमाल कीजिये।
👉 *टाइफाइड*
चुटकी भर दालचीनी की फंकी
चाहे अकेले ही चाहे शहद के साथ
दिन में दो बार लेने से
टाइफाईड नहीं होता।
👉 *ध्यान*
हर रोज़ कम से कम 15 से 20
मिनट मैडिटेशन ज़रूर करे।
👉 *नाक*
रात को सोते समय नित्य
सरसों का तेल नाक में लगाये।
हर तीसरे दिन दो कली लहसुन
रात को भोजन के साथ ले।
प्रात: दस तुलसी के पत्ते और
पांच काली मिर्च नित्य चबाये।
सर्दी, बुखार, श्वांस रोग नहीं होगा।
नाक स्वस्थ रहेगी।
👉 *मालिश*
स्नान करने से आधा घंटा पहले
सर के ऊपरी हिस्से में
सरसों के तेल से मालिश करे।
इस से सर हल्का रहेगा,
मस्तिष्क ताज़ा रहेगा।
रात को सोने से पहले
पैर के तलवो, नाभि,
कान के पीछे और
गर्दन पर सरसों के तेल की
मालिश कर के सोएं।
निद्रा अच्छी आएगी,
मानसिक तनाव दूर होगा।
त्वचा मुलायम रहेगी।
सप्ताह में एक दिन पूरे शरीर में
मालिश ज़रूर करे।
👉 *योग और प्राणायाम*
नित्य कम से कम आधा घंटा
योग और प्राणायाम का
अभ्यास ज़रूर करे।
👉 *हरड़*
हर रोज़ एक छोटी हरड़
भोजन के बाद दाँतो तले रखे
और इसका रस धीरे धीरे
पेट में जाने दे।
जब काफी देर बाद ये हरड़
बिलकुल नरम पड़ जाए
तो चबा चबा कर निगल ले।
इस से आपके बाल कभी
सफ़ेद नहीं होंगे,
दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे
और पेट के रोग नहीं होंगे।
👉 *सुबह की सैर*
सुबह सूर्य निकलने से पहले
पार्क या हरियाली वाली जगह पर
सैर करना सम्पूर्ण स्वस्थ्य के लिए
बहुत लाभदायक हैं।
इस समय हवा में प्राणवायु का
बहुत संचार रहता हैं।
जिसके सेवन से हमारा पूरा शरीर
रोग मुक्त रहता हैं और हमारी
रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती हैं।
👉 घी खाये मांस बढ़े,
अलसी खाये खोपड़ी,
दूध पिये शक्ति बढ़े,
भुला दे सबकी हेकड़ी।
👉तेल तड़का छोड़ कर
नित घूमन को जाय,
मधुमेह का नाश हो
जो जन अलसी खाय ।।

रसोई बनाम दवाखाना

Friday, April 22, 2022

Ayurvedic Tips : भारतीय रसोई में कई तरह के मसाले और सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. ये हमें फिट और हेल्दी रखने में मदद करते हैं. आइए जानें कौन सी सामग्री आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं.

आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार आपकी रसोई आवश्यक पोषक तत्वों का भंडार है. रसोई में ऐसे कई तरह के मसाले होते हैं जिनका इस्तेमाल व्यंजनों में किया जाता है. ये मसाले बाजार में आसानी से मिल जाते हैं. ये मसाले (spices) न केवल खाने के स्वाद को बढ़ाते हैं बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. ये मसाले वजन कम करने और शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में भी आपकी मदद करते हैं. इन मसालों में दालचीनी, जीरा, धनिया और हींग जैसे मसाले शामिल हैं. ये मासले आपके पाचन तंत्र (Digestive System) को भी स्वस्थ रखते हैं. आइए जानें और कौन से मसाले आपकी सेहत के लिए लाभदायक हैं.

अदरक
ये सबसे प्रसिद्ध मसालों में से एक है जो लगभग हर भारतीय रसोई में होता है. ये आयुर्वेदिक उपचार का एक बड़ा हिस्सा है. ये शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है. ये पेट में पाचन एंजाइमों के स्राव को भी बढ़ाता है. ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है. अदरक को खाने में शामिल करने के अलावा अदरक से बनी चाय का सेवन भी कर सकते हैं. ये सर्दी या साइनस संक्रमण के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में काम करती है.


दालचीनी
दालचीनी में एंटीवायरल गुण होते हैं. ये सामान्य सर्दी पैदा करने वाले वायरस से लड़ने में मदद करती है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो गले की खराश से राहत दिलाते हैं.

जीरा
जीरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं. ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है. ये गैस की समस्या से राहत दिलाता है.

धनिया
इस मसाले में ठंडक देने के गुण होते हैं. ये पेट में अत्यधिक गर्मी के कारण एसिड रिफ्लक्स से पीड़ित लोगों के लिए बहुत अच्छा है. ये सूजन, पेट फूलना आदि की समस्या से राहत दिलाता है. ये भूख को बढ़ाता है. ये पेट के कीड़ों को मारता है.

हींग
हींग की सुंगध बहुत तेज होती है. ये पाचन में सुधार करने के लिए बहुत उपयोगी मसाला है. इसके सुखदायक गुण पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं. हींग सूजन, पेट फूलना, पेट दर्द, ऐंठन और डकार को कम करने में मदद करती है.

हल्दी
हल्दी का इस्तेमाल अधिकतर व्यंजनों में किया जाता है. आयुर्वेदिक उपचारों में इसका बहुत महत्व है. ये पित्त दोष के लिए अच्छा होती है. ये इम्युनिटी बढ़ाने और लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करती है. ये जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है.

इलाइची
इलाइची का इस्तेमाल मीठे और नमकीन दोनों तरह के व्यंजनों में किया जाता है. इसका इस्तेमाल माउथ फ्रेशनर के रूप में भी किया जाता है. चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कुछ पीसे हुए सुगंधित इलायची के बीज मिला सकते हैं. आयुर्वेद के अनुसार ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखती है.