सामान्य उपाय स्वस्थ रहने के

Sunday, April 24, 2022

👉 *आंवला*
किसी भी रूप में थोड़ा सा
आंवला हर रोज़ खाते रहे,
जीवन भर उच्च रक्तचाप
और हार्ट फेल नहीं होगा।
👉 *मेथी*
मेथीदाना पीसकर रख ले।
एक चम्मच एक गिलास
पानी में उबाल कर नित्य पिए।
मीठा, नमक कुछ भी नहीं डाले।
इस से आंव नहीं बनेगी,
शुगर कंट्रोल रहेगी और
जोड़ो के दर्द नहीं होंगे
और पेट ठीक रहेगा।
👉 *नेत्र स्नान*
मुंह में पानी का कुल्ला भर कर
नेत्र धोये।
ऐसा दिन में तीन बार करे।
जब भी पानी के पास जाए
मुंह में पानी का कुल्ला भर ले
और नेत्रों पर पानी के छींटे मारे, धोये।
मुंह का पानी एक मिनट बाद
निकाल कर पुन: कुल्ला भर ले।
मुंह का पानी गर्म ना हो इसलिए
बार बार कुल्ला नया भरते रहे।
भोजन करने के बाद गीले हाथ
तौलिये से नहीं पोंछे।
आपस में दोनों हाथो को रगड़ कर
चेहरा व कानो तक मले।
इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं।
नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं।
👉 *शौच*
ऐसी आदत डाले के नित्य
शौच जाते समय दाँतो को
आपस में भींच कर रखे।
इस से दांत मज़बूत रहेंगे,
तथा लकवा नहीं होगा।
👉 *छाछ*
तेज और ओज बढ़ने के लिए
छाछ का निरंतर सेवन
बहुत हितकर हैं।
सुबह और दोपहर के भोजन में
नित्य छाछ का सेवन करे।
भोजन में पानी के स्थान पर
छाछ का उपयोग बहुत हितकर हैं।
👉 *सरसों तेल*
सर्दियों में हल्का गर्म सरसों तेल
और गर्मियों में ठंडा सरसों तेल
तीन बूँद दोनों कान में
कभी कभी डालते रहे।
इस से कान स्वस्थ रहेंगे।
👉 *निद्रा*
दिन में जब भी विश्राम करे तो
दाहिनी करवट ले कर सोएं। और
रात में बायीं करवट ले कर सोये।
दाहिनी करवट लेने से बायां स्वर
अर्थात चन्द्र नाड़ी चलेगी, और
बायीं करवट लेने से दाहिना स्वर
अर्थात सूर्य स्वर चलेगा।
👉 *ताम्बे का पानी*
रात को ताम्बे के बर्तन में
रखा पानी सुबह उठते बिना
कुल्ला किये ही पिए,
निरंतर ऐसा करने से आप
कई रोगो से बचे रहेंगे।
ताम्बे के बर्तन में रखा जल
गंगा जल से भी अधिक
शक्तिशाली माना गया हैं।
👉 *सौंठ*
सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम
और कफ से बचने के लिए
पीसी हुयी आधा चम्मच सौंठ
और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में
इतना उबाले के आधा पानी रह जाए।
रात को सोने से पहले यह पिए।
बदलते मौसम, सर्दी व वर्षा के
आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं।
सौंठ नहीं हो तो अदरक का
इस्तेमाल कीजिये।
👉 *टाइफाइड*
चुटकी भर दालचीनी की फंकी
चाहे अकेले ही चाहे शहद के साथ
दिन में दो बार लेने से
टाइफाईड नहीं होता।
👉 *ध्यान*
हर रोज़ कम से कम 15 से 20
मिनट मैडिटेशन ज़रूर करे।
👉 *नाक*
रात को सोते समय नित्य
सरसों का तेल नाक में लगाये।
हर तीसरे दिन दो कली लहसुन
रात को भोजन के साथ ले।
प्रात: दस तुलसी के पत्ते और
पांच काली मिर्च नित्य चबाये।
सर्दी, बुखार, श्वांस रोग नहीं होगा।
नाक स्वस्थ रहेगी।
👉 *मालिश*
स्नान करने से आधा घंटा पहले
सर के ऊपरी हिस्से में
सरसों के तेल से मालिश करे।
इस से सर हल्का रहेगा,
मस्तिष्क ताज़ा रहेगा।
रात को सोने से पहले
पैर के तलवो, नाभि,
कान के पीछे और
गर्दन पर सरसों के तेल की
मालिश कर के सोएं।
निद्रा अच्छी आएगी,
मानसिक तनाव दूर होगा।
त्वचा मुलायम रहेगी।
सप्ताह में एक दिन पूरे शरीर में
मालिश ज़रूर करे।
👉 *योग और प्राणायाम*
नित्य कम से कम आधा घंटा
योग और प्राणायाम का
अभ्यास ज़रूर करे।
👉 *हरड़*
हर रोज़ एक छोटी हरड़
भोजन के बाद दाँतो तले रखे
और इसका रस धीरे धीरे
पेट में जाने दे।
जब काफी देर बाद ये हरड़
बिलकुल नरम पड़ जाए
तो चबा चबा कर निगल ले।
इस से आपके बाल कभी
सफ़ेद नहीं होंगे,
दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे
और पेट के रोग नहीं होंगे।
👉 *सुबह की सैर*
सुबह सूर्य निकलने से पहले
पार्क या हरियाली वाली जगह पर
सैर करना सम्पूर्ण स्वस्थ्य के लिए
बहुत लाभदायक हैं।
इस समय हवा में प्राणवायु का
बहुत संचार रहता हैं।
जिसके सेवन से हमारा पूरा शरीर
रोग मुक्त रहता हैं और हमारी
रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती हैं।
👉 घी खाये मांस बढ़े,
अलसी खाये खोपड़ी,
दूध पिये शक्ति बढ़े,
भुला दे सबकी हेकड़ी।
👉तेल तड़का छोड़ कर
नित घूमन को जाय,
मधुमेह का नाश हो
जो जन अलसी खाय ।।

रसोई बनाम दवाखाना

Friday, April 22, 2022

Ayurvedic Tips : भारतीय रसोई में कई तरह के मसाले और सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. ये हमें फिट और हेल्दी रखने में मदद करते हैं. आइए जानें कौन सी सामग्री आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं.

आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार आपकी रसोई आवश्यक पोषक तत्वों का भंडार है. रसोई में ऐसे कई तरह के मसाले होते हैं जिनका इस्तेमाल व्यंजनों में किया जाता है. ये मसाले बाजार में आसानी से मिल जाते हैं. ये मसाले (spices) न केवल खाने के स्वाद को बढ़ाते हैं बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. ये मसाले वजन कम करने और शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में भी आपकी मदद करते हैं. इन मसालों में दालचीनी, जीरा, धनिया और हींग जैसे मसाले शामिल हैं. ये मासले आपके पाचन तंत्र (Digestive System) को भी स्वस्थ रखते हैं. आइए जानें और कौन से मसाले आपकी सेहत के लिए लाभदायक हैं.

अदरक
ये सबसे प्रसिद्ध मसालों में से एक है जो लगभग हर भारतीय रसोई में होता है. ये आयुर्वेदिक उपचार का एक बड़ा हिस्सा है. ये शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है. ये पेट में पाचन एंजाइमों के स्राव को भी बढ़ाता है. ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है. अदरक को खाने में शामिल करने के अलावा अदरक से बनी चाय का सेवन भी कर सकते हैं. ये सर्दी या साइनस संक्रमण के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में काम करती है.


दालचीनी
दालचीनी में एंटीवायरल गुण होते हैं. ये सामान्य सर्दी पैदा करने वाले वायरस से लड़ने में मदद करती है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो गले की खराश से राहत दिलाते हैं.

जीरा
जीरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं. ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है. ये गैस की समस्या से राहत दिलाता है.

धनिया
इस मसाले में ठंडक देने के गुण होते हैं. ये पेट में अत्यधिक गर्मी के कारण एसिड रिफ्लक्स से पीड़ित लोगों के लिए बहुत अच्छा है. ये सूजन, पेट फूलना आदि की समस्या से राहत दिलाता है. ये भूख को बढ़ाता है. ये पेट के कीड़ों को मारता है.

हींग
हींग की सुंगध बहुत तेज होती है. ये पाचन में सुधार करने के लिए बहुत उपयोगी मसाला है. इसके सुखदायक गुण पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं. हींग सूजन, पेट फूलना, पेट दर्द, ऐंठन और डकार को कम करने में मदद करती है.

हल्दी
हल्दी का इस्तेमाल अधिकतर व्यंजनों में किया जाता है. आयुर्वेदिक उपचारों में इसका बहुत महत्व है. ये पित्त दोष के लिए अच्छा होती है. ये इम्युनिटी बढ़ाने और लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करती है. ये जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है.

इलाइची
इलाइची का इस्तेमाल मीठे और नमकीन दोनों तरह के व्यंजनों में किया जाता है. इसका इस्तेमाल माउथ फ्रेशनर के रूप में भी किया जाता है. चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कुछ पीसे हुए सुगंधित इलायची के बीज मिला सकते हैं. आयुर्वेद के अनुसार ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखती है.


बढ़े हुए यूरिक एसिड के घरेलू उपाय

*यूरिक एसिड के घरेलू उपाय*
भाग (1)

* पहले यूरिक एसिड की समस्या 50-60 साल की उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन आजकल गलत लाइफस्टाइल के कारण युवा भी इससे पीड़ित हो रहे हैं। तनाव, शराब का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, व्यायाम की कमी, पानी का खराब सेवन और खराब आहार सभी यूरिक एसिड और इसके लक्षणों में योगदान करते हैं।

 *यूरिक एसिड क्या है?*

* कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के मिश्रण से एक यौगिक बनता है, जिसे शरीर प्रोटीन से अमीनो एसिड के रूप में प्राप्त करता है जिसे यूरिक एसिड कहा जाता है।

 * इसलिए अगर यूरिक एसिड को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह गठिया और गठिया का कारण बन सकता है। प्राचीन वस्तुओं को देखने या अपॉइंटमेंट लेने के तरीके के बारे में यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं। *

*तरल भोजन खूब खाएं*

* यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए खूब पानी पीना जरूरी है। फलों के रस, नारियल पानी और ग्रीन टी जैसे तरल पदार्थों का सेवन करें। *

*सभी रंगों की सब्जियां*

*हर रंग की सब्जियों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। हरी, लाल, नारंगी सब्जियों से आपको सारे पोषक तत्व मिलेंगे, जो न सिर्फ एसिड को नियंत्रित करते हैं बल्कि अन्य समस्याओं से भी बचाते हैं।

*खट्टे फल (साइट्रिक एसिड फल)*

* खट्टे फल यूरिक एसिड क्रिस्टल को घोलकर यूरिक एसिड के स्तर को कम करते हैं। अपने आहार में फलों को अवश्य शामिल करें, लेकिन केवल सीमित मात्रा में। *

सूक्ष्म *छोटी इलायची*

* छोटी इलायची को पानी में मिलाकर खाने से यूरिक एसिड का स्तर कम होगा और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होगा।

* मीठा सोडा *

1 गिलास पानी में 1/2 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर पीने से यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

*ओवा*

* ओवा यूरिक एसिड से शरीर में होने वाली सूजन को कम करता है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए दिन में 2-3 चम्मच ओवा का सेवन करें।

*रोज सेब खाएं*

*सेब में मौजूद एसिड यूरिक एसिड को बेअसर करता है।*

* नींबू का रस *

*नींबू यूरिक एसिड को नियंत्रित करता है। सुबह खाली पेट नींबू का रस पीने से आपको फायदा होगा। साथ ही दिन में चार से पांच बार नींबू पानी पिएं।

* चेरी *

* चेरी और डार्क चेरी में फ्लेवोनोइड्स नामक तत्व होते हैं, जो यूरिक एसिड को कम करने में मदद करते हैं। सूजन और जकड़न को दूर करता है। *

C/p

कैसे पाएं डेंड्रफ से मुक्ति

Thursday, April 21, 2022

कैसे पायें डैंड्रफ-फ्री बाल

कैसे पायें डैंड्रफ-फ्री बाल – बालों में रुसी (डैंड्रफ) का होना एक साधारण समस्या है पर इस साधारण समस्या को नजरअंदाज कभी-कभी खतरनाक भी हो सकता है, इसलिए डैंड्रफ की शुरुआत होते ही उस पर समय रहते काबू पा लेना चाहिए ताकि बड़ी मुसीबत से बचा जा सके |
शैम्पू का चुनाव सोच समझ कर करें

बालों के लिए एंटी-डैंड्रफ शैंपू का चुनाव करना चाहिए | एंटीडैंड्रफ शैंपू लेते समय उसमे इस्तेमाल पदार्थों को ध्यान में रखना चाहिए | इस में कोलतार, सेलिसिलिक एसिड, जिंक, सल्फर या सलेनियम सल्फाइड शामिल होता है क्योंकि हर केमिकल अपने तरीके से रुसी को कम करने का कार्य करता है |

डैंड्रफ होने पर बालों को प्रतिदिन शैंपू से धोएं ताकि बाहरी प्रदूषित वातावरण उस पर अपना प्रभाव न छोड़ पाए | प्रतिदिन शैंपू करने से केशों (बालों) का अतिरिक्त तेल भी निकल जाता है और मैल भी जमा नहीं हो पाता | इससे मृत त्वचा भी निकल जाती है |

यदि आप कई महीनो से लगातार एक ही शैंपू यूज़ कर रही है और रुसी पुनः हो जाती है तो उस शैंपू को बदल लें | हो सकता है आपके बालों में उस शैंपू में इस्तेमाल पदार्थ के प्रति प्रतिरोधक शक्ति पैदा हो गई हो |

ऐसे में 3 ब्रांडों के एंटीडैंड्रफ शैंपू प्रयोग करें | एक ब्रांड के शैंपू का 1 महीने तक प्रयोग करें | फिर दूसरे माह दूसरे ब्रांड का और तीसरे माह तीसरे ब्रांड का शैंपू प्रयोग करें | फिर पुनः अपने पुराने शैंपू को 1 माह तक प्रयोग में लाएं | ऐसा करने पर केशों में डैंड्रफ अपना कब्ज़ा नहीं जमा पाएगा |

ऐसे करें शैंपू का प्रयोग

बालों को सप्ताह में कम से कम 2 बार अवश्य धोएं | शैंपू करते समय पहले बालों को अच्छी तरह गीला कर लें और शैंपू को एक मग में थोड़ा सा पानी डालकर माइल्ड कर लें | फिर उसे बालों पर लगाकर थोड़ा सा मलें | मलते समय पोरों का प्रयोग करें ताकि सिर की त्वचा के साथ चिपकी रुसी और बालों में आया प्राकृतिक तेल अच्छी तरह साफ हो जाए |

दूसरी बार शैंपू करते समय बालों पर शैंपू लगाकर 3-4 मिनट तक छोड़ दें ताकि शैंपू में विद्यमान कैमिकल्स त्वचा के सेल्स में घुस कर अपना कार्य कर सकें | पुनः बालों को अच्छी तरह से रिंस कर लें |

बालों से पूरी तरह शैंपू निकालने के बाद सिर की त्वचा पर 1 चम्मच नीबू का रस लगाएं | अंत में बालों को अच्छी तरह रिंस कर लें | नीबू का रस बालों से डैंड्रफ तो दूर करेगा ही, साथ ही बालों में चमक भी बनी रहेगी |

C/p

अंगूर यानि द्राक्षा

Wednesday, April 20, 2022


द्राक्षा एक श्रेष्ठ प्राकृतिक मेंवा है, इसका स्वाद मीठा होता है। इसकी गणना उत्तम फलों की कोटि में की जाती है। इसकी बेल होती है। बेल का रंग लालिमा लिये हुए रहता है। द्राक्ष की बेल 2-3 वर्ष की होने पर फलने-फूलने लगती है।
 खासकर फरवरी-मार्च के महीनों में बाजार में हरी द्राक्ष अधिक मात्रा में दिखाई देती है। 
द्राक्ष 2 तरह की होती है- पहला काला और दूसरा सफेद। सफेद द्राक्ष अधिक मीठा होता है। 
काली द्राक्ष सभी रोगों में लाभकारी और गुणकारी होती है। काली द्राक्ष का दवा में अधिक प्रयोग होता है। बेदाना, मुनक्का और किशमिश- ये द्राक्ष की प्रमुख किस्में है।

किशमिश अधिकतर बेदाना जैसी ही, परन्तु कुछ छोटी होती है। द्राक्ष गर्म देशों के लोगों की भूख और प्यास को शान्त करने में उपयोगी है। यह पित्तशामक और रक्तवर्धक है। 
हरी द्राक्ष कफकारक मानी जाती है परन्तु सेंधानमक अथवा नमक के साथ सेवन से कफ होने का खतरा नहीं होता है।
 सूखी द्राक्ष की अपेक्षा हरी द्राक्ष कुछ खट्टी परन्तु अधिक स्वादिष्ट और गुणकारी होती है। द्राक्ष काजू के साथ नाश्ते के रूप में ली जाती है।
 पुराने कब्ज वाले लोग यदि रोज ज्यादा द्राक्ष खाएं तो इससे कब्ज दूर होती है। 
जिन लोगों को पित्त प्रकोप हुआ हो वे यदि द्राक्ष का सेवन करें तो उनका पित्तप्रकोप शान्त होता है, शरीर में होने वाली जलन दूर हो जाती है तथा उल्टी भी बंद हो जाती है। यदि शरीर कमजोर हो और वजन न बढ़ता हो, आंखों में धुंधलापन महसूस होता है, जलन रहती हो तो द्राक्ष का सेवन करने से यह सभी रोग नष्ट हो जाते हैं। 
द्राक्ष में विटामिन `सी´ होता है जिसके कारण स्कर्वी और त्वचा रोग नष्ट हो जाते हैं। द्राक्ष खाने से शरीर में स्फूर्ति व ताजगी आती है।
 खट्टी द्राक्ष रक्तपित्त करती है। हरी द्राक्ष, भारी, खट्टी, रक्तपित्तकारक, रुचिकारक, उत्तेजक और वातनाशक है। पकी द्राक्ष मल को साफ करने वाली, आंखों के लिए लाभदायक, शीतल रस में मीठा, आवाज को अच्छा बनाने वाली, मल-मूत्र को बाहर निकालने वाली, पेट में गैस करने वाली, वीर्यवर्धक और कफ तथा रुचि पैदा करने वाली है। 

विभिन्न रोगों में उपयोग : 

1.)_ सिर की गर्मी : 
20 ग्राम द्राक्ष को गाय के दूध में उबालकर रात को सोने के समय पीने से सिर की गर्मी निकल जाती है। 

2.)_ मूर्च्छा (बेहोशी) : 
द्राक्ष को उबाले हुए आंवले और शहद में मिलाकर रोगी को देने से मूर्च्छा (बेहोशी) के रोग में लाभ मिलता है। 

3.)_ सिर चकराना : 
लगभग 20 ग्राम द्राक्ष पर घी लगाकर रोजाना सुबह इसको सेवन करने से वात प्रकोप दूर हो जाता है। यदि कमजोरी के कारण सिर चकराता हो तो वह भी ठीक हो जाता है। 

4.)_ आंखों की गर्मी व जलन : 
लगभग 10 ग्राम द्राक्ष को रात में पानी में भिगोकर रखे। इसे सुबह के समय मसलकर व छानकर और चीनी मिलाकर पीने से आंखों की गर्मी और जलन में लाभ मिलता है। 

5.)_ अम्लपित : 
20 ग्राम सौंफ व 20 ग्राम द्राक्ष को छानकर और 10 ग्राम चीनी मिलाकर थोड़े दिनों तक सेवन करने से अम्लपित, खट्टी डकारें, खट्टी उल्टी, उबकाई, आमाशय में जलन होना, पेट का भारीपन के रोग में लाभ पहुंचता है। 

6.)_ खांसी :
 बीज निकाली हुई द्राक्ष, घी और शहद को एक साथ चाटने से क्षत कास (फेफड़ों में घाव उत्पन्न होने के कारण होने वाली खांसी) में लाभ होता है। 

7.)_ बलवर्द्धक : 
20 ग्राम बीज निकाली हुई द्राक्ष को खाकर ऊपर से आधा किलो दूध पीने से भूख बढ़ती है, मल साफ होता है तथा यह बुखार के बाद की कमजोरी को दूर करता है और शरीर में ताकत पैदा करता है। 

8.)_ कब्ज :
 10-10 ग्राम द्राक्ष, कालीमिर्च, पीपर और सैंधा नमक को लेकर पीसकर कपड़े में छानकर चूर्ण बना लें। फिर इसमें 400 ग्राम काली द्राक्ष मिला लें और चटनी की तरह पीसकर कांच के बर्तन में भरकर सुरक्षित रख लें। इसकी चटनी `पंचामृतावलेह´ के नाम से प्रसिद्ध है। इसे आधा से 20 ग्राम तक की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से अरुचि, गैस, कब्जियत, दर्द, मुंह की लार, कफ आदि रोग दूर होते है। 
9.)_ तृषा व क्षय रोग :
 लगभग 1200 मिलीलीटर पानी में लगभर 1 किलो शक्कर डालकर आग पर रखें। उबलने के बाद इसमें 800 ग्राम हरी द्राक्ष डालकर डेढ़ तार की चासनी बनाकर शर्बत तैयार कर लें। यह शर्बत पीने से तृषा रोग, शरीर की गर्मी, क्षय (टी.बी) आदि रोगों में लाभ होता है। 

10.)_ खांसी में खून आना :
 10 ग्राम धमासा और 10 ग्राम द्राक्ष को लेकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से उर:शूल के कारण खांसी में खून आना बंद हो जाता है।

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100 ज़रूरी जानकारी

Thursday, April 14, 2022

कुछ 100 जानकारी 

1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
   
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है ।

3. *हाई वी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।

4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।

5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।

6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं ।

7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी ।

8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी ।

9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।

10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।

11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी ।

12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।

13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।

14.  *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।

15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।

16. *अस्थमा , मधुमेह , कैसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।

17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।

18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।

19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 

20. *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।

21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।

22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है । 

23.  *भोजन* के लिए पूर्व दिशा , *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।

24.  *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।

25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।

26.  *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है । 

27.  *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।

28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।

29.  *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।

30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।

31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।

33.  *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।

34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।

35.  *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।

36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।

37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।

38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।

39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।

40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।

41.  *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।

42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 

43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।

44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।

45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।* 

46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।

47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए । 

48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।

49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 

50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 

51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है । 

52.  *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।

53.  *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।

54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।

55.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।

56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।

57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 

58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।

59. *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।

60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 

61.  *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।

62.  *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।* 

63.  *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए ।

64.  *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*

65.  *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।

66.  *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।

67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।

68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।

69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।

70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है । 

71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें ।

72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 

73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।* 

75.  *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।

76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।

77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।

78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए । 
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि । 

80.  *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें । 

81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए । 

82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।*

83. *जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*

84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है । 

85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है । 

86 .  *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग । 

87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए । 

88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । 

89.  *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं । 

90. *चिंता , क्रोध , ईष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।* 

91.  *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*

92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।

93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा ।

94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।

95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है । 

96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है । 

97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*। 

98 . *तेज धूप* में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है । 

99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त , कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।

100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूकें

शक्ति वर्द्धक कुछ आयुर्वेदिक उपाय

Tuesday, September 16, 2014

ताकत बढाने के उपाय
पुष्टिवर्धक प्रयोग ********

1.जौ: जौ का पानी में भिगोकर, कूट के, छिलका रहित कर उसे दूध में खीर की भाँति पकाकर सेवन करने से शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है और मोटापा कम होता है। 3 से 5 अंजीर को दूध में उबाल कर या अंजीर खाकर दूध पीने से शक्ति बढ़ती है।
2.रात्रि में एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर उसमें दो किशमिश भिगो दें। सुबह पानी छानकर पी जायें एवं किशमिश चबाकर खा लें। यह एक अदभुत शक्तिदायक प्रयोग है।
3. केला: केले को सुबह खाने से उसकी कीमत ताँबे जैसी, दोपहर को खाने से चाँदी जैसी और शाम को खाने से सोने जैसी होती है। शारीरिक श्रम न करने वालों को केला नहीं खाना चाहिए। केला सुबह खाली पेट भी नहीं खाना चाहिए। भोजन के बाद दो केले खाने से पतला शरीर मोटा होने लगता है।
4. मिश्री : लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में सालम मिश्री, शतावर और सफेदी मूसली को लेकर बारीक पीस लें और छान लें। अब इस चूर्ण को 400 मिलीलीटर दूध में डालकर पकायें और 300 मिलीलीटर दूध रह जाने पर इसको उतारकर इस दूध में शक्कर मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से आदमी के शरीर में से आलस्य दूर हो जाता है और उसको पर्याप्त मात्रा में ताकत भी मिलती है। इसका सेवन लगातार 20 दिनों तक करना चाहिए।
5. बिनौला : लगभग 50 ग्राम की मात्रा में बिनौला को लेकर भून लें और कूटकर इसका चूर्ण बना लें। लगभग 50 ग्राम की मात्रा में सफेद मूसली को लेकर बिनौला के चूर्ण के साथ अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। इसके बाद लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम इस चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से मनुष्य के शरीर में शक्ति का विकास होता है।
6. मालकांगनी : लगभग 250 ग्राम मालकांगनी को गाय के घी में भूनकर, इसमें 250 ग्राम शक्कर मिलाकर चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण को लगभग 6 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सुबह और शाम को खाने से मनुष्य के शरीर में ताकत का विकास होता है। इसका सेवन लगभग 40 दिनों तक करना चाहिए।
7. घी : लगभग 20 ग्राम घी को 30 ग्राम शहद के साथ मिलाकर भोजन करने के बाद खाने से मनुष्य की याददाश्त के साथ ही साथ उसके शरीर की ताकत भी बढ़ती है।
लगभग 250 ग्राम की मात्रा में शुद्ध देसी घी में बनी जलेबियों को लगभग 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ रोजाना सुबह के समय लेने से मनुष्य की लम्बाई बढ़ती है। इसका सेवन लगातार 2 या 3 महीने तक करना चाहिए।
8. दालचीनी : दालचीनी को बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें। शाम को इसके लगभग 2 ग्राम चूर्ण को 250 मिलीलीटर दूध में डालकर एक चम्मच शहद को मिलाकर पीने से शरीर की ताकत के साथ-साथ मनुष्य के वीर्य यानी धातु में भी वृद्धि होती है।
9. चना : लगभग 50 ग्राम की मात्रा में चने की दाल को लेकर 100 मिलीलीटर कच्चे दूध में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इस दाल में किशमिश और मिश्री मिलाकर अच्छी तरह से चबा कर खायें। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए। इससे शरीर को ताकत मिलती है और मनुष्य का वीर्य और बल भी बढ़ता है।रात को सोते समय थोड़े से देसी चने लेकर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर गुड़ के साथ इन चनों को रोजाना खूब-खूब चबाकर खाने से शरीर की लम्बाई बढ़ती है। चनों की मात्रा शरीर की पाचन शक्ति के अनुसार बढ़ानी चाहिए। इन चनों को दो या तीन महीने तक खाना चाहिए।
10. विदारीकन्द : लगभग 6 ग्राम की मात्रा में विदारीकन्द के चूर्ण को लगभग 10 ग्राम गाय के घी में और लगभग 20 ग्राम शहद में मिलाकर गाय के दूध के साथ लेने से शरीर में ताकत आती है। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए।
11. तुलसी : एक निश्चित मात्रा में तुलसी के बीज या पत्तों को भूनकर इतनी ही मात्रा में इसमें गुड़ मिलाकर लगभग 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर सुबह और शाम को 1-1 गोली गाय के दूध के साथ लेने से शरीर में भरपूर ताकत आती है और व्यक्ति की मर्दानगी भी बढ़ती है।लगभग आधा ग्राम की मात्रा में तुलसी के पीसे हुए बीजों को सादे या कत्था लगे पान के साथ रोजाना सुबह और शाम खाली पेट खाने से मनुष्य के वीर्य, बल और खून में वृद्धि होती है।लगभग एक भाग तुलसी के बीजों के चूर्ण को दो भाग पुराने गुड़ में मिलाकर खाने से शरीर में ताकत आती है। इसका प्रयोग लगभग 14 दिनों अथवा 40 दिनों तक करना चाहिए और इसका सेवन केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए।
12. भिलावे : लगभग 25 ग्राम की मात्रा में छिलका उतारे और तेल निकाले हुए भिलावे को लेकर 2 या 3 घंटों तक कूटें और फिर इसके बाद लगभग 400 ग्राम की मात्रा में तिल का तेल लेकर भिलावे में 50-50 ग्राम की मात्रा में डालते जायें, और घोटते जायें। इसके बाद लगभग 1 घंटे बाद इसको निकाल लें। रोजाना इसे 2 ग्राम की मात्रा में सुबह दूध के साथ लेने से शरीर में भरपूर ताकत आती है।
13. जौ :आवश्यकता के अनुसार जौ को लेकर पानी में भिगोकर कूट लें और इनका छिलका उतार लें। अब लगभग 60 ग्राम की मात्रा में छिले हुए जौ को लगभग 500 मिलीलीटर दूध में डालकर इसकी खीर बनायें। 2 महीनों तक इसको लगातार खाने से पतला आदमी भी मोटा हो जाता है, और उसके शरीर में जबरदस्त ताकत आ जाती है। अगर इस खीर का प्रयोग प्रतिदिन न कर सकें तो हफ्ते में कम से कम 2 या 3 बार जरूर ही सेवन करें।उबाले हुए जौ का पानी रोजाना सुबह और शाम पीने से शरीर में खून बढ़ता है। जौ का पानी गर्मियों के दिनों में पीने से अधिक लाभ मिलता है।
14. केला : दिन में खाना-खाने के बाद 2 या 3 पके केले रोजाना नियमित रूप से खाने से शरीर में शक्ति, मांस और चर्बी बढ़ती है। इसका प्रयोग लगातार 2 महीने तक करने से शरीर सुंदर बन जाता है।
15. आंवला : लगभग 10 ग्राम की मात्रा में हरे आंवला को लगभग इतनी ही मात्रा में शहद में मिलाकर खाने से मनुष्य के वीर्य-बल में वृद्धि होती है। आंवलों के मौसम में इसका सेवन रोजाना सुबह के समय लगभग 1 से 2 महीने तक करना चाहिए।
बराबर मात्रा में आंवले का चूर्ण, गिलोय का रस, सफेद मूसली का चूर्ण, गोखरू का चूर्ण, तालमखाना का चूर्ण, अश्वगंध का चूर्ण, शतावरी का चूर्ण, कौंच के बीजों का चूर्ण और मिश्री का चूर्ण लेकर इनका मिश्रण बना लें। अब इस मिश्रण को रोजाना सुबह और शाम को लगभग 10 से 15 ग्राम की मात्रा में फांककर ऊपर से हल्का गर्म दूध पीने से मनुष्य के संभोग करने की शक्ति का विकास होता है। इसको लगातार 3 या 4 महीने तक फायदा होने तक खाना चाहिए।
16. किशमिश : सुबह के समय लगभग 25 से 30 किशमिश लेकर इनको गर्म पानी से धोकर साफ कर लें और कच्चे दूध में डाल दें। आधा या एक घंटे बाद उस दूध को गर्म करें। इसके बाद किशमिश को एक-एक करके खा लें और ऊपर से उसी दूध को पी लें। ऐसा करने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा आवश्यकता से अधिक ठंड़ का अनुभव, पुरानी बीमारी, अधिक कमजोरी, जिगर की खराबी और बदहजमी दूर हो जाती है।
17. अंगूर : लगभग 25 मिलीलीटर की मात्रा में अंगूर का रस भोजन करने के आधे घंटे बाद पीने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा इसका रस पीने से पेट फूलना, अफारा, दिल का दौरा पड़ना, चक्कर आना, सिरदर्द और भोजन न पचना आदि बीमारियां दूर हो जाती है। इसका सेवन लगभग 2 या 3 हफ्ते तक लगातार करना चाहिए। इसके अलावा इसका सेवन महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। कमजोर बच्चों को भोजन के बाद अंगूर का रस पिलाना काफी लाभकारी सिद्ध होता है। अंगूर का रस बच्चों के चेहरे को लाल कर देता है।
18. पालक : शरीर में कमजोरी आने पर या खून की कमी होने पर लगभग 225 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना पालक का रस पीना चाहिए। इससे चेहरा एक दम गुलाब की तरह लाल हो जाता है। इसके अलावा इसका रस पीने से मानसिक तनाव और हाई ब्लडप्रेशर भी सामान्य रहता है।
19. टमाटर : टमाटर का रोजाना सेवन करने से खून शुद्ध रहता है, और खून में वृद्धि होती है। टमाटर खाने से आंखों के रोग, जिगर में किसी तरह की खराबी आने के कारण होने वाली सुस्ती, आंतों के कीड़ें और आमाशय की कमजोरी दूर होती है। टमाटर पाचन क्रिया को बढ़ाता है। पथरी वाले व्यक्ति को टमाटर नहीं खाना चाहिए।
20. सौंफ : सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम भोजन के बाद दो चम्मच लेने से दिमाग तेज होता है। इसका सेवन लगातार एक या दो महीने तक करना चाहिए।
21. मालकांगनी :मालकांगनी के बीज, बच, देवदारू और अतीस आदि का मिश्रण बना लें। रोज सुबह-शाम इस मिश्रण को 1 चम्मच घी के साथ पीने से दिमाग तेज और फुर्तीला बनता है।
मालकांगनी के तेल की 5-10 बूंदे मक्खन के साथ सेवन करने से भी शरीर को लाभ मिलता है।
22. धनिया :शक्ति को ऊर्जा भी कहते हैं। यह ऊर्जा मनुष्य को भोजन से मिलती है। परन्तु धनिया इस ऊर्जा को और बढ़ा देता है। इसके लिए आपको खाना खाने के बाद दस दाने धनिया के मुंह में डालने होंगे। इन दानों को दाढ़ों से कुचलकर इसका रस कंठ (गले) के नीचे उतार लीजिए और दानों को थूक देते हैं। ठीक आधा घंटे बाद आप देखेंगे कि आपके शरीर में गर्मी बढ़ गई। यह गर्मी पसीना लाने वाली गर्मी नहीं होती बल्कि यह पाचनक्रिया को सही करने वाली गर्मी होती है क्योंकि जब पाचन क्रिया में वृद्धि होगी तब भोजन समय से तथा ठीक प्रकार से पच जाएगा। इसके बाद रक्त में जो ऊर्जा पैदा होती है वह पूरे शरीर में फुर्तीलापन लाती है।लगभग 3 ग्राम की मात्रा में साबुत सूखे धनिये को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को ठंड़े पानी और मिश्री के साथ मिलाकर गर्मी के दिनों में पीने से पित्त के कारण होने वाले रोगों से छुटकारा मिल जाता है।
23. मौसमी : मौसमी का रस मस्तिष्क और जिगर को शक्ति तथा स्फूर्ति देता है। जटिल रोगों तथा बुखार में मौसमी का रस सेवन करने से रोगी कमजोर नहीं होता है। मौसमी को खाने से शरीर में से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं। इसका नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज, सिरदर्द, काम करने में मन न लगना, थोड़ा काम करने पर थक जाना, रात को नींद न आना आदि कष्ट दूर हो जाते हैं। मौसमी का रस दूध में मिलाकर छोटे बच्चों को पिलाना चाहिए।
24. मुनक्का : लगभग 60 ग्राम मुनक्का को धोकर भिगो दें। 12 घण्टे के बाद भीगे हुए मुनक्के खाने से पेट के रोग दूर होते है और शरीर में खून और वीर्य बढ़ जाता है। मुनक्का की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाकर 200 ग्राम तक सेवन करने से लाभ मिलता हैं।मुनक्का को गर्म पानी से धोकर रात को भिगो दें। प्रात: समय उसके पानी को पीलें तथा दानों को खालें। ऐसा रोजाना करने से शारीरिक कमजोरी दूर हो जाती हैं। खून और शक्ति उत्पन्न होती हैं। फेफड़ों को बल मिलता हैं।रात को सोने से पहले लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर मुनक्का को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बन्द हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 या 4 हफ्ते तक करना चाहिए।
25. मूंग : मूंग के लड्डू खाने से भी शरीर में शक्ति बढ़ती हैं। मूंग को सेंककर आटा बना लें। आटे के बराबर घी लेकर, कड़ाही में धीमी आंच पर रखें और कलछी से हिलाते जाएं। जब आटा कुछ लाल हो जाए तब बीच-बीच में उसके ऊपर दूध छिड़कते जाएं। ऐसा करते-करते आटे की गांठे सी बन जाएं तब कड़ाही को चूल्हे से नीचे उतारकर उसमें शर्करा, बादाम, पिश्ते, इलायजी, लौंग और कालीमिर्च का चूर्ण डालकर लड्डू बना लें। मूंग के ये लड्डू शीतल, वीर्यवर्धक और वातशामक होते हैं।
साबुत मूंग को पानी मे उबालकर उस पानी को छान लें। फिर इस पानी में नमक और कालीमिर्च को स्वाद के अनुसार डालकर थोड़ी सी हींग भी डाल लें। यह पानी ऐसे रोगी जिन्हे रोग के कारण अन्न देना मना हो देना काफी लाभकारी रहता है।
26. गाजर : गाजर में विटामिन `ई´ पर्याप्त मात्रा में होता है। इस कारण यह पुरुषों के लिए शक्तिवर्द्धक टानिक का काम करती है।लगभग 250 ग्राम कच्ची गाजर खाने से और उसके ऊपर से लगभग 1 लीटर पानी पीने से ‘शरीर में शक्ति बढ़ती है और शरीर मजबूत होता है।गाजर, पीपर, आंवला, चौलाई, इमली, सेब, मूली के पत्ते और संतरा खाने से शरीर में खून की वृद्धि होती है।लगभग 125 मिलीलीटर की मात्रा में गाजर का रस रोजाना सुबह और शाम पीने से शरीर में होने वाले फोड़े-फुन्सियां ठीक हो जाते है। इसके अलावा शरीर का खून भी साफ हो जाता है और शरीर का वजन बढ़ जाता है।इसका सेवन लगातार लगभग 15 या 20 दिनों तक करना चाहिए।
27. मेथी : मेथी में कोलाइन तत्त्व होता है, जो विचार शक्ति को बढ़ाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर में रोग-प्रतिरोधक (रोग-निरोधक) क्षमता को बढ़ाते हैं। 2 चम्मच दाना मेथी को एक गिलास पानी में 5 घंटे तक भिगोयें और फिर इतना उबाल लें कि चौथाई मात्रा में रह जाये। इसे छानकर इसमें 2 चम्मच शहद को मिलाकर एक बार रोजाना पियें। मेथी में लोहा होता है जो शक्ति देता है, खून बढ़ाता है। मेथी के पत्तों की सब्जी खानी चाहिए।100 ग्राम दाना मेथी को घी में भूनकर मोटा-मोटा पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी से फंकी के रूप में लें। इसको लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है और वीर्य पुष्ट होता है।1.1 किलो दाना मेथी और गेहूं को एक साथ मिलाकर पीस लें। फिर इसको रोजाना 2 चम्मच के रूप में लगातार 2 महीने तक सुबह और शाम दूध के साथ फंकी के रूप में लेने से शरीर मजबूत होता है। रोजाना 2 बार 1 चम्मच दाना मेथी की फंकी पानी से लेने से स्नायविक दौर्बल्य, कमजोरी और सूखा रोग दूर हो जाता है।
28. संतरा : 1 गिलास संतरे का रस रोजाना दो बार कुछ सप्ताह तक पीते रहने से शरीर में ताकत आ जाती है। जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं कमजोर होते है, उनके लिए संतरे का रस बहुत लाभदायक होता है।
29. सफेद पेठा : भोजन करने के बाद पेठे की मिठाई खाने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है। पित्त विकार में 2-2 पेठे के टुकड़े रोजाना खाने से लाभ होता है।
30. पुनर्नवा : पुनर्नवा को दूध के साथ खाने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है।
31. नींबू : एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू को निचोड़कर पीते रहने से शरीर के अंग-अंग में नई शक्ति महसूस होती है, आंखों की रोशनी बढ़ती है, मानसिक कमजोरी, सिर में दर्द और पुट्ठों में झटके लगना बन्द हो जाते हैं। अधिक मेहनत के कारण आई कमजोरी में इस पानी में बिना नमक या चीनी को मिलाकर घूंट-घूंट करके पीने से शरीर में कमजोरी नहीं रहती हैं। ध्यान रहें कि पथरी के रोगी को नींबू नहीं देना चाहिए।
32. फालसा : पके फालसे का सेवन करने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है। यह हृदय रोग और रक्तपित्त या खूनी पित्त में भी काफी हितकारी होता है।
33. पपीता : बच्चों को रोजाना पपीता खिलाने से उनकी लम्बाई बढ़ती है और शरीर मजबूत तथा सेहत सही बनी रहती है।
34. नारियल : सर्दियों के मौसम में रोजाना सुबह-सुबह खोपरा और गुड़ को मिलाकर चबा-चबाकर खाने से
युवक-युवतियो या बच्चों के शरीर में वृद्धि होती हैं।
35. पानी : सुबह मुंह साफ करके ठंड़ा पानी पीने से शरीर में स्फूर्ति (ताजगी) आती है।
36. पापड़ : जो लोग किसी बीमारी से ठीक होकर उठे हों और उनकी पाचनशक्ति (भोजन पचाने की शक्ति) कमजोर हो गई हो तो भोजन के साथ पापड़ खाने से पाचनशक्ति तेज होती है और शरीर मे खून भी बढ़ता है।
37. अर्जुन : अर्जुन बलकारक है तथा अपने लवण-खनिजों के कारण हृदय की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है। दूध तथा गुड़, चीनी आदि के साथ जो अर्जुन की छाल का पाउडर नियमित रूप से लेता है, उसे हृदय रोग, जीर्ण ज्वर, रक्त-पित्त कभी नहीं सताते और वह चिरजीवी होता है।
38. 40 ग्राम किशमिश, 6 मुन्नका, 6 बादाम और 6 पिस्ते को रात को सोते समय आधा किलो पानी में डालकर कांच के बर्तन में भिगो दें। सुबह उठकर इसे पीसकर, छान लें और इसमें 1 चम्मच ‘शहद और 1 नींबू निचोड़कर खाली पेट पी लें। इससे मानसिक व शारीरिक कमजोरी, थकान दूर होती है।
39. दूध व चावल की खीरः यह सर्वप्रिय, शीतल, पित्तशामक, मेदवर्धक, शक्तिदायक, वातपित्त, रक्तपित्त, अग्निमांद्य व अरूचि का नाश करने वाला सात्त्विक आहार है। यह शरद ऋतु में विशेष लाभकारी है।
विधिः प्रति व्यक्ति एक के हिसाब से काली मिर्च डालकर चावल को पहले पका लें। फिर उसमें दूध, मिश्री व डालनी हो तो इलायची डालकर एक उबाल आने पर उतार लें और ढक के रख दें। रात को खीर बनानी हो तो काली मिर्च न डालें।
40. बथुआ : बथुआ को साग के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। पत्तों के साग में बथुआ का साग सबसे अधिक फायदेमन्द और सेहतमन्द होता है। इसका सेवन निरन्तर रूप से करने से मनुष्य की मर्दानगी बढ़ती है, खून में वृद्धि होती है, याद्दाश्त मजबूत होती है, आमाशय मजबूत होता है, पथरी से बचाव होता है, कब्ज और पेट में होने वाली जलन से छुटकारा मिल जाता है। हरे बथुए का सेवन अधिक लाभकारी होता है। अगर हरा बथुआ न मिले तो इसे सूखाकर रोटी में मिलाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है